(सहज आसिकी नाहिं) Sahaj Asiki Nahin

172
0
(सहज आसिकी नाहिं) Sahaj Asiki Nahin

सत्य विश्वास नहीं है, अनुभव है।
सब विश्वास झूठे होते हैं। सब विश्वास अंधे होते हैं।
मानना मत, अगर जानना हो।
जानने के लिए इतनी हिम्मत चाहिए—न मानने की हिम्मत।
खाली रहने की हिम्मत।
अपने को विश्वास के कचरे से नहीं भरेंगे, चाहे कोई भी कीमत चुकानी पड़े।
जीवन छिने तो छिन जाए, मगर अपनी आत्मा नहीं बेचेंगे।—ओशो

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु:
क्या है प्रेम? कैसा है प्रेम का मार्ग?
क्या हम सार्थक प्रश्न पूछना जानते हैं?
धर्म क्या है?
क्यों कठिन है सत्य को पचाना?

अनुक्रम
#1: यह प्रेम का मयखाना है
#2: सहज निर्मलता
#3: आत्म-श्रद्धा की कीमिया
#4: संन्यास यानी नया जन्म
#5: अब प्रेम के मंदिर हों
#6: है इसका कोई उत्तर
#7: मैं तुम्हारा कल्याण-मित्र हूं
#8: स्वाध्याय ही ध्यान है
#9: जिसको पीना हो आ जाए
#10: अंतर-आकाश के फूल

उद्धरण : सहज आसिकी नाहिं – नौवां प्रवचन – जिसको पीना हो आ जाए

“एक और भी तो प्रार्थना है मौन की। एक और भी तो प्रार्थना है ध्यान की। वही तो प्रार्थना है। वही तो प्रेम का, वही तो अस्तित्व के साथ प्रणय का वास्तविक निवेदन है–जब तुम मौन कृतज्ञभाव में झुक जाते हो। न कुछ कहने को है न कुछ सुनने को है। और ध्यान रहे, जब न कुछ कहने को है, तभी कुछ कहा जाता है। और जब न कुछ सुनने को है, तभी सुना जाता है। वही प्रार्थना परमात्मा तक पहुंचती है जो निःशब्द है, जो मौन है, जो शून्य अनुग्रह का भाव है, जो शुद्ध प्रेम है। फूल भी नहीं, सिर्फ सुगंध है।

फूल में भी वजन होता है, गिरेगा तो जमीन पर गिर जाएगा। ऐसे ही शब्दों में वजन होता है। गिरेंगे तो जमीन पर गिर जाते हैं। और सुगंध आकाश की तरफ उठने लगती है, चांद-तारों की तरफ चलने लगती है। सुगंध यूं है जैसे दीये की ज्योति। ज्योति तो ऊपर की तरफ जाती है; दीये को गिराओगे तो नीचे की तरफ गिरेगा। लेकिन ज्योति को तुम लाख नीचे की तरफ गिराना चाहो, नहीं गिरा सकते। ज्योति का स्वभाव ही ऊर्ध्वगमन है।

ऐसे ही मौन ऊपर की तरफ जाता है, शून्य ऊपर की तरफ जाता है, क्योंकि शून्य में कोई वजन नहीं होता। शब्दों में वजन होता है। तुम भी जानते हो कि शब्दों में वजन होता है। लोग कहते हैं कि उसने बड़ी वजनी गाली दी। शब्दों में वजन होता है, गालियों में वजन होता है। तो प्रार्थनाओं में भी वजन होगा। थोड़ा कम सही, छटांक, आधी छटांक, कम। गाली अगर मनों में तौली जाए तो समझो कि प्रार्थना को सेरों में तौल लेना, पसेरियों में तौल लेना। लेकिन वजन तो होगा शब्दों में। सिर्फ शून्य में वजन नहीं होता। और जिसमें वजन नहीं है वह गुरुत्वाकर्षण के पार हो जाता है।”—ओशो

Listen More

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Filter by Creator/Author

Filter by Language