(नेति नेति – सम्भावनाओं की आहट) Neti Neti – Sambhavnaon Ki Aahat

609
0
(नेति नेति – सम्भावनाओं की आहट) Neti Neti – Sambhavnaon Ki Aahat

मनुष्य के जीवन में जो सबसे बड़ा दुर्भाग्य है, वह शायद यही कि जीवन से उसकी आत्म-एकता, उसकी एकतानता टूट गयी है। जीवन से हम कुछ दूर-दूर खड़े हो गये हैं। जीवन और हमारे बीच कोई सेतु नहीं रहा, कोई संबंध नहीं रहा

मां के पेट से बच्चे का जन्म होता है, तब शरीर तो टूट जाता है मां से अलग। तब एक भेद एक पृथकता की यात्रा शुरू होती है; जो मां के साथ संयुक्त और इकट्ठा था, वह पृथक हो जाता है। शायद उसी पृथकता से यह भ्रम पैदा होता है कि शरीर अलग हो गया, इसलिए प्राण भी अलग हो गये होंगे। शायद शरीर अलग हो गया, इसलिए भीतर के जीवन में भी भेद पड गया होगा।

मां के शरीर से बच्चे का शरीर अलग होता है, लेकिन आत्मा एक और अपृथक है, समस्त जीवन से। वहां कोई भेद नहीं, वहां कोई भिन्नता नहीं। लेकिन उस अभेद का, उस अद्वैत का, हमें कोई अनुभव नहीं होता, कोई स्मरण नहीं होता, कोई बोध नहीं होता!

मनुष्य के जीवन में यही दुर्भाग्य है। इस दुर्भाग्य को ही पार कर जाना साधक कि लिए दूसरा चरण है।

पहले चरण में मैंने आपसे कहा, ज्ञान मिथ्या है, ज्ञान असत्य है। सीखे हुए शब्द, सिद्धांत और शास्त्रों से ज्यादा नहीं। अज्ञान, इग्नोरेंस मनुष्य की वस्तु-स्थिति है। अज्ञान को जो स्वीकार कर लेता है और इस स्मरण से भर जाता है कि मैं नहीं जानता हूं, जीवन और उसके बीच की पहली दीवाल गिर जाती है।

लेकिन एक दूसरी दीवाल भी है। उसके संबंध में ही आज सुबह मुझे आपसे बात करनी है। वह भी गिर जानी चाहिए, जो ही व्यक्ति परमात्मा के सत्य को अनुभव कर सकता है। जो परमात्मा का सत्य है, वही स्वयं का सत्य भी है। उसे कोई जीवन कहे, उसे कोई मोक्ष कहे, उसे कोई ईश्वर कहे, इससे कोई भी भेद, कोई भी फर्क नहीं पड़ता है। दूसरे दुर्भाग्य की दीवाल पहले दुर्भाग्य की दीवाल ज्ञान की दीवाल है। दूसरे दुर्भाग्य की दीवाल क्या है?

Listen More

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Filter by Creator/Author

Filter by Language