(नये मनुष्य का धर्म) Naye Manushya Ka Dharm

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(नये मनुष्य का धर्म) Naye Manushya Ka Dharm

धर्म यदि कुछ है, तो मेरी दृष्टि में जागने की प्रक्रिया है। धर्म न तो पूजा है, न प्रार्थना। क्योंकि सोए हुए आदमी की न पूजा का कोई अर्थ है और न प्रार्थना का। धर्म न शास्त्रों को जान लेना है, न सिद्धांतों को सीख लेना।

जीवन के विभिन्न पहलुओं पर ओशो द्वारा दिए गए सात अमृत प्रवचनों का अपूर्व संकलन

उससे हम सूरज के संबंध में कुछ कहेंगे या कि सोचेंगे कि इस आदमी ने आंखें बंद कर रखी हैं इसीलिए प्रश्न उठा है सूरज के संबंध में। सूरज भी मौजूद हो तो भी जो आदमी आंख बंद किए है वह अंधकार में होता है। सूरज उसके अंधकार को नहीं मिटा सकता। परमात्मा प्रकाश की भांति

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