(ना कानों सुना) Na Kano Suna

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(ना कानों सुना) Na Kano Suna

अकथ कहानी प्रेम की’ एवं ‘होनी होय सो होय’ दो प्रवचनमालाओं के बीस प्रवचन “न कानों सुना न आंखों देखा’’ पुस्तक में संगृहीत किए गए हैं। फरीद व कबीर जैसे अदभुत भक्तों के वचनों पर ओशो की अंतर्दृष्टि पाठक को स्वतः ही किसी दूसरे ही लोक की यात्रा पर सहज ही.

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