(ज्योति से ज्योति जले) Jyoti Se Jyoti Jale

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(ज्योति से ज्योति जले) Jyoti Se Jyoti Jale

‘सुंदरदास उन थोड़े से कलाकारों में एक हैं जिन्होंने इस ब्रह्म को जाना। फिर ब्रह्म को जान लेना एक बात है, ब्रह्म को जनाना और बात है। सभी जानने वाले जना नहीं पाते। करोड़ों में कोई एकाध जानता है और सैकड़ों जानने वालो में कोई एक जना पाता है।

#1: मौन सेतु है सत्संग का
#2: गंता ही गंतव्य है
#3: साधु आठौ जाम बैठो
#4: त्याग अर्थात अपना ही स्वाद
#5: है दिल में दिलदार
#6: मनुष्य-जाति को संदेश
#7: मारग जोवै बिरहनी
#8: प्रेम अर्थात धर्म
#9: दीया राखै जनत सा
#10: संन्यास यानी अभय
#11: मन ही बड़ौ कपूत है
#12: प्रेम जादू है
#13: संत समागम कीजिए
#14: एकांत मधुर है
#15: हारो और पुकारो
#16: आत्मा ही परमात्मा है
#17: मिटी न दरस पियास
#18: क्रांति मेरा नारा है
#19: हमारे गुरु दीनी एक जरी
#20: रीते घर पाहुन पग धारे
#21: तुमही ठाकुर तुमही दासा

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